डॉ. कालूराम परिहार, कार्यक्रम निष्पादक, आकाशवाणी जैसलमेर द्वारा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति


पश्चिमी राजस्थान के जैसलमेर जि़ले के अजासर गाँव में जन्मे डॉक्टर कालूराम परिहार स्कूली शिक्षा गाँव में पूरी करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए पहली बार जोधपुर शहर के तत्कालीन जोधपुर विश्वविद्यालय, जो अब जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है, से स्नातक और हिन्दी में स्नातकोत्तर तक की शिक्षा ग्रहण की । इस दौरान दिन में पढा़ई और रात को रिसैप्शनिश्ट की नौकरी कर के अपनी पढा़ई पूरी की । पढा़ई के दौरान ही वे युववाणी कार्यक्रम के आक्समिक कॉम्पीयर के रुप में चयनित हूए । जब वो उच्च शिक्षा के लिए गाँव से निकले थे तब मन में प्रशासनिक अधिकारी बनने का सपना संजोया था । लेकिन आधारभूत पढा़ई पूरी करने के बाद परिवार में आर्थिक सहयोग की जि़म्मेदारी के कारण अपने प्रशासनिक अधिकारी बनने के सपने को मूर्त रुप नहीं दे पाये, और बहुत से जॉब्स के लिए आवेदन किया, और 1989 में प्रसारण निष्पादक के पद पर चयनित हो कर आकाशवाणी उदयपुर में कार्यभार ग्रहण कर लिया । लेकिन सामाजिक सीढी़ पर ऊपर चढ़ने की उनकी इच्छा ख़त्म नहीं हुई । नौकरी के साथ साथ उन्होंने हिन्दी में "हिन्दी आलोचना की परंपरा और डॉ राम विलास शर्मा" विषय पर पी.एच.डी की । पढ़ने और पढा़ने में डॉ. परिहार की गहरी रुचि इसी बात से दिखती है कि पी.एच.डी के बाद भी उन्होंने पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, और फ्रैंच भाषा में डिप्लोमा किया । बचपन में उनके प्रशासनिक अधिकारी बनने के सपने का वो लगातार पीछा करते रहे, और आखि़र में राजस्थान लोक सेवा आयोग से चयनित हो कर सहायक निदेशक पर्यटन बन कर उन्होंने जैसलमेर में पदभार ग्रहण किया । बतौर सहायक निदेशक पर्यटन उन्होंने जैसलमेर के विश्व प्रसिद्ध मेले "डैज़र्ट फैस्टिवल" और जोधपुर के विश्व प्रसिद्ध मेले "मारवाड़ समारोह" का सफल प्रशासनिक संयोजन किया । उनका मन प्रसारण और प्रशासन दोनों में उलझा और अटका हुआ था । दो साल के अंदर ही वो पुनः आकाशवाणी में आ गये और कार्यक्रम निष्पादक के पद पर पदोन्नत हो गये । यहाँ उनकी लेखनी को परवाज़ मिला और उन्होंने कई साहित्यिक, सांस्कृतिक लेखों के अतिरिक्त चार पुस्तकें लिखी । 1) लोक जीवन के कलात्मक आयाम
2) राजस्थान के लोकनृत्य और लोकनाट्य
3) मीडिया के सामाजिक सरोकार
4) हिन्दी आलोचना की परंपरा और डॉ. राम विलास शर्मा
(जो उनका शोधप्रबंध था)
डॉ. परिहार ने महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्द्धा के लिए हिन्दी में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम बनाया । 
डॉ. परिहार को वर्ष 2007-08 के लिए इन्दिरा गाँधी राजभाषा सम्मान से सम्मानित किया गया । 
2008 में भारतेन्दु हरीशचंद्र सम्मान से सम्मानित किया गया । 
2008 में आकाशवाणी राजभाषा सम्मान से सम्मानित किया गया । 2009 में आकाशवाणी राजभाषा सम्मान से सम्मानित किया गया । 2011-12 के लिए इन्दिरा गाँधी राजभाषा से सम्मानित किया गया । 
डॉ. परिहार की सफलता में उनकी धर्मपत्नी श्रीमती चंपा देवी की बहुत अहम् भूमिका रही है । उनके दो पुत्र हैं जिनमें से छोटे पुत्र विनोद ने आई आई टी की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की लेकिन पसंद की संस्था और ब्राँच नहीं मिलने के कारण इन्द्रप्रस्थ दिल्ली कॉलेज औफ इंजीनियरिंग से बी टैक करने के बाद भारतिय सिविल सेवा परीक्षा पास की और वर्तमान में भारतिय अकाउंट एंड आडिट सर्विस में कोलकात्ता में तैनात है । 
हम डॉ. परिहार के स्वस्थ और श्रेष्ठ सेवानिवृत्त जीवन की कामना करते हैं ।

प्रसार भारती परिवार उनको इस निवृत्ति पश्चात जीवन के लिए हार्दिक शुभकामनाए देती है । 

अगर कोई अपने ऑफिस से निवृत्त होने वाले कर्मचारी के बारे में कोई जानकारी ब्लॉग को भेजना चाहते है तो आप जानकारी pbparivar @gmail .com पर भेज सकते है

प्रेषक :- श्री. अनिल कुमार गोयल 
nostalgic58@yahoo.com

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