आकाशवाणी अंबिकापुर केंद्र की 44वीं वर्षगांठ

 


आकाशवाणी अंबिकापुर केंद्र आज अपनी स्थापना का 44 वाँ वर्षगाँठ मना रहा है । छत्तीसगढ़ के उत्तर मे बसा सरगुजा जिले में 26 दिसंबर 1976 को आकाशवाणी अंबिकापुर की शुरूआत करने का उद्देश्य समाज के हरेक वर्ग को कार्यक्रमों के माध्यम से जोड़ना था। आकाशवाणी अंबिकापुर की शुरूआत तब हुई थी जब सुदूर क्षेत्रों मे मनोरंजन का साधन एकमात्र रेडियो हुआ करता था । उस जमाने में रेडियो की ख्याति अकल्पनीय थी । 

आकाशवाणी अंबिकापुर से प्रसारित होने वाले कुछ विशेष कार्यक्रम जैसे पंखुड़ियां, ज्ञान विज्ञान, रसधारा को काफी सराहना मिली। धारावाहिक भोकोदास भी इनमे से एक था । नाटक फातिहा, रामगढ़ की नर्तकी, हय वदन आज भी लोगों के दिलों मे रचा बसा है। तब आकाशवाणी मे एक बड़ी टीम हुआ करती थी और कलाकारों की एक लंबी फेहरिस्त थी। तब के अधिकारियों और कर्मचारियों के लगन और संयोजन का ही असर था कि आज भी आकाशवाणी अंबिकापुर का नाम मजबूती से स्थापित है। आज आकाशवाणी अंबिकापुर को 44 साल पूरे हो गए हैं फिर भी इसकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है , दर्शकों के द्वारा प्रतिदिन सैकड़ों पोस्टकार्ड, ईमेल के माध्यम से और और फोन के द्वारा फरमाइश किया जाता है । 

 कार्यक्रमों की प्रसिद्धि ने यहां का गौरव और बढ़ाया। उस दौरान अंबिकापुर के स्टूडियो में प्रसिद्ध तबला वादक पं. सामता प्रसाद, उ. निजामुद्दीन खां, उ. अब्दुल हलीम जाफर खां सितार, बुद्धादित्य मुखर्जी सितार, पं. राजन-साजन मिश्र, गुलाम मुस्तफा खान गायन सहित सिंह बंधु एवं डागर बंधु ने कार्यक्रम प्रस्तुत किए। प्रसिद्ध गजल गायक मो. हुसैन एवं अहमद हुसैन भी अंबिकापुर आकाशवाणी के कई कार्यक्रमों में शिरकत कर चुके हैं। 

इसका दायरा और इसके श्रोताओं में कोई कमी नहीं है। वाईफाई और सोशल मीडिया के जमाने में देश विदेशों से भी गीत संगीत सुनने के लिए श्रोताओं की फरमाइश यहां प्राप्त हो रहे हैं । सार्थक एवं स्वस्थ मनोरंजन के साथ आप भी सुनते रहिये आकाशवाणी अंबिकापुर के कार्यक्रम। 

स्त्रोत : AIR अम्बिकापुर के fb अकाउंट 

द्वारा अग्रेषित : श्री झावेन्द्र कुमार ध्रुव रायपुर

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