विविध भारती की लोकप्रिय उद्घोषिका रेडियोसखी ममता सिंह के पहले कहानी संग्रह ‘राग मारवा’ को मिला ‘मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन’ का बेहद प्रतिष्ठित ‘वागीश्वरी पुरस्कार’।
















विविध भारती की लोकप्रिय उद्घोषिका रेडियोसखी ममता सिंह के पहले कहानी संग्रह 'राग मारवा' को मिला 'मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य सम्मेलन' का बेहद प्रतिष्ठित 'वागीश्वरी पुरस्कार'।'वागेश्वरी सम्मान' का आयोजन 13 अक्टूबर रविवार की सुबह था।कार्यक्रम की अध्यक्षता सुविख्यात कथाकार प्रियंवद जी ने की। मुख्य आतिथ्य स्वीकारा स्वनामधन्य कथाकार श्री गिरिराज किशोर जी ने। मंच पर प्रसिद्ध कथाकार महेश कतरे  जी की उपस्थिति, मंच को गरिमा प्रदान करती रही थी । कार्यक्रम का सफल संचालन श्री विजय अग्रवाल जी ने किया।

विदित हो कि ममता सिंह का शुमार हिंदी की युवा पीढी के प्रतिभाशाली कथाकारों में होता है। उनकी कहानियां देश की तमाम प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होती हैं। राग मारवा में दस लंबी कहानियाँ शामिल हैं। सभी में समाज में तेजी से आ रहे बदलाव, चाहे अच्छे हों या बुरे, को कुछ सीधे और कुछ साफ़ स्वर में कहा है। उनकी कहानी विशेषकर 'आखिरी कांट्रैक्ट' हमारे देश में असहिष्णुता और फैलती दहशत को मार्मिक ढंग से बयां करती है। साहित्य जगत में ममता सिंह पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से बेहद परिचित नाम है। वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए., प्रयाग संगीत समिति से "शास्त्रीय संगीत में प्रभाकर" और रूसी भाषा में डिप्लोमा प्राप्त हैं। वर्तमान में विविध भारती, मुम्बई में उद्घोषिका हैं। श्रोताओं के बीच 'रेडियो सखी' के नाम से लोकप्रिय हैं तथा 'छायागीत' और 'सखी सहेली' कार्यक्रम का संचालन करती हैं।

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